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(収録種別:SARDA)の該当件数は2903件です。
81-90件目
 

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81 जानकीपंचाशिका : जिसमें देवी अष्टक और जानकी मंगल भी अन्त में संयुक्त है / उमरायने रचना किया / Umarāya -- Navalakiśora1896SARDA
82 वैद्यजीवन भाषा : इस पुस्तक में सम्पूर्ण रोगों की उपयोगिक औषध वर्णित हैं / शङ्करप्रसाद ने लोलिम्बराज संस्कृत पुस्तक से छन्दों में उल्था किया / Lolimbarāja,Śaṅkara Prasāda -- Navalakiśora1903SARDA
83 भानप्रकाशिका : जिसमें श्रीराधामाधोजी के लीलाविषयक अनेक प्रकार के राग रागिनियों में अत्यन्त रसीली विरहभरी गानेकी चोज़ें लिखी हैं व सम्पूर्ण रागरागिनियों की व्याख्यान भी सरलरीति से लिखीगई है / मुन्शीदूधनाथ लाल ने बाबूरामदयाल, बाबूगुलाबराय व रामप्रसाद के अनुग्रहसे रचनाकिया / Dūdhanātha Lāla,Rāmadayāla,Gulābarāya,Rāmaprasāda -- Navalakiśora1906SARDA
84 युगलसम्बाद : बोधप्रकाश : जिसमें योगवाशिष्ठादि वेदान्त ग्रन्थों का सार मत गुरु शिष्य के प्रश्नोत्तरों सहित तथा भगवद्गीतादि के प्रमाणों से भूषितहै / महात्मा युगलकिशोर ने वर्णन किया है / Yugalakiśora -- Navalakiśora1895SARDA
85 सेनापतिऊदल : दुःखान्त : नाटक / वृन्दावनलालवर्म्मा रचित / Varmmā, Vr̥ndāvanalāla -- Navalakiśora1909SARDA
86 वर्णप्रकाशिका / रायदुर्गाप्रसाद से तर्जुमा होकर / Rāyadurgā Prasāda -- 1. hissā -- Navalakiśora1918SARDA
87 पत्रमालिका / पण्डित श्रीलालने बनाई / Śrīlālane, Paṇḍita -- Navalakiśora1891SARDA
88 चुरिहारिन लीला : अर्थात् श्रीकृष्णजी महाराज का चुरिहारिन बन कर श्रीराधिकाजी महारानी से मिलना / विश्वेश्वरप्रसाद ने निर्माण किया / Viśveśvara Prasāda -- Navalakiśora1909SARDA
89 श्रीरसार्णव : जिसमें अष्टनायकाओं अर्थात् स्वकिया, परकीया, मध्या, सामान्या, उत्का, प्रौढ़ा, प्रगल्भादिके भेद व लक्षण काब्य रीतिसे मनोहर दोहाकवित्तों में वर्णित हैं / श्रीशुकदेव कवि ने निर्मितकिया / Śukadeva -- Navalakiśora1890SARDA
90 नानार्थ नवसंग्रहा वली / माता दीन शुक्ल से वनवाया / Śukla, Mātā Dīna -- Navalakiśora1874SARDA

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