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(type:SARDA)の該当件数は2903件です。
231-240件目
 

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231 शिवरत्नसंग्रह : अरथात् अलौकिक रत्नों का भंडार अपूर्वगुणों का आगार गृहस्थों का परम उपकार साधुसंतों का आधार हिताहित का विचार भवसागर निस्तार रसिको का बिहार नीत्या दर्शियों का सार है / शिवराम शुक्ल ने संग्ह किया / Śukla, Śivarāma -- Navalakiśora1900SARDA
232 श्रीरामस्तवराजः : प्रातर्निवेदनका-दशावतारस्तोत्र-चतुःश्लोकीभागवत-शिवद्वादशज्योतिर्लिंगानि-समेतः / Newul Kishore Press1898SARDA
233 तनुरक्षक धर्मप्रकाशक : जिसमें यावद्देहधारी पुरुषों को नित्य नैमित्तिक कर्म करना पड़ता है उसका सविस्तर विधान है अर्थात् प्रातःकालसे सायंकाल शयन पर्यन्त यावद्धर्म स्वरूप कर्म करना चाहिये उसका वर्णन और देह रक्षाके लिये सम्पूरण वस्तुओं का यथोचित विधान वर्णन है / बाबा परमानन्दने निर्मितकिया / Paramānanda, Svāmī -- Navalakiśora1904SARDA
234 अनिरुद्धपरिणय / ललनपिया ने रचना किया / Lalana Piyā -- Navalakiśora1903SARDA
235 रामबिनयबाटिका : सच्चिदानन्द आनन्दकन्द श्रीरामचन्द्रजीके विशेष रीतिसे अनेकप्रकारके रागोंके द्वारा अत्यन्त ललितपद वर्णन किये गये हैं / जानकीप्रसादने रचना किया / Prasāda, Jānakī -- Navalakiśora1897SARDA
236 ऋषिकुलशुभसमाचार / ताराचन्द शर्मा ने निर्मान कर प्रकाशित किया / Śarmā, Tārācanda -- Navalakiśora1915SARDA
237 रहस्यचन्द्रिका : जिसमें श्रीपरब्रह्म परमेश्वर श्रीकृष्णचन्द्र आनन्द कन्द का श्रीबृषभानुनन्दिनी राधिका और अन्य ब्रजगोपियों के साथ शरद् रास करना अनेक मनोहारी ललितछन्दों में वर्णनहै / वरबख्शराम पाण्डे उपनाम सुजान कवि ने निर्माण किया / Pāṇḍe, Varabakhśarāma -- Navalakiśora1896SARDA
238 छन्दोर्णवपिंगल : जिसमें मात्रावृत्त, वर्णवृत्त, मेरु, मर्कटी, पताका और प्रति छंद लघुगुरु गण-स्थापन-रीति और अति रमणीय छंदों के उदाहरण, हिंदी-भाषा-कवित्व रसिकों के उपकारार्थ अति सुगमता से वर्णित हैं / भिखारीदासकृत / Bhikhārīdāsa -- Navalakiśora1928SARDA
239 सामुद्रिक : जिसमें पुरुष और स्त्रियोंके शिरसे लेकर चरण पर्यन्त सब अंगों के लक्षण, वीर्य्य, रक्त, और हाथ की रेखाके लक्षण, स्त्रियोंके अशुभ, शुभ, उत्तम, मध्यम, और रानीहोने के लक्षण इत्यादि अनेक विषय बर्णितहैं / Navalakiśora1896SARDA
240 जातक पारिजात संस्कृत : जिसमें सूर्यादि नवग्रह फल, योग पिहित भाव विचार, विषाख्य कन्या, सुनफादि योग, राज्ययोग, आयुर्बल व्यत्ययविचार, अरिष्टादि योग और सर्व प्रकारके अरिष्ट नाश होनेके उपाय वर्णन किये गये हैं / जयोतिर्बित् भवानीप्रसाद ने रचा / Prasāda, Bhavānī -- Navalakiśora1888SARDA

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