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171 काशीमाहात्म्य / Navalakiśora[19--]SARDA
172 [सारस्वत सटीक] / [पण्डित शक्तिधर] / Sukula, Śaktidhara -- [Navalakiśora][1893]SARDA
173 कुलोचितधर्मशिक्षा : भाषा टीका समेत : जिसमें चारोंवर्णों के कर्म की प्रधानता श्रीशङ्कराचार्य्य जीको जैनबौद्धादिकों के मतको श्रुतिस्मृति पुराणों से खण्डन करके दिग्विजयके इतिहास व गौतम महर्षिके शाप से पाखण्ड मतकी उत्पत्ति का वृत्तान्त और अनेक प्रकार के धर्म्मों का कथन भली भांति वर्णित है / शिवगोविन्द शर्मा से निर्माण कराई / Śarmā, Śivagovinda -- Navalakiśora1910 SARDA
174 बैराग्यप्रकाश : अन्तर्ग्गत भजनप्रदीप व सज्जनबिलास : जिसमें अत्युत्तम बैराग्य व ज्ञान निर्मान और काम क्रोध लोभ मोह जगद्विषयादि खण्डन सहित ईश्वर यशानुराग मण्डन व भगवती शिवकाशी विश्वनाथादिप्रशंसा सहित मनोहरपद अल्हैया भैरवी होरी खेम टादिरागोंमें बर्णित है / माधवसिंहने निर्मित किया / Siṃha, Mādhava -- Navalakiśora1880 SARDA
175 ज्ञानदीपका : जिसमें प्रेमानुरागियों के चित्त विनोदार्थ : स्वयंब्रह्म परमेश्वर व महादेवजी के कीर्त्तन व स्तोत्र व हनुमानअष्टक अतिसुगमता के साथ अनेक प्रकार के ललित छन्दों में वर्णित हैं / दत्तसिंह ने बनाया ; पंडित दयानन्द ने संशोधनकिया / Varmmā, Dattasiṃha,Paṇḍita, Dayānanda -- Navalakiśora1889 SARDA
176 सारस्वत सटीक : जिसमें हसान्त पुल्लिंग, हसान्त स्त्रीलिंग, हसान्त नपुंसकलिंग, युष्मदस्मद्शब्द, अव्यय और स्त्रीप्रत्यय पर्य्यन्त विषय वर्णित हैं / पण्डितउमादत्त और पण्डितशक्तिधर सुकुलने भाषाटीका रचना किया / Umādatta,Sukula, Śaktidhara -- 2. khaṇḍa -- Navalakiśora1891 SARDA
177 श्रीदुर्गाबिजयभाषा : जिसमें श्रीमज्जगज्जननी दुष्टदैत्यनिकन्दिनी परमेश्वरी श्रीभगवती दुर्गाजीकाचरित्र वर्णित है / ठाकुरहरिपालसिंह ने रचनाकिया / Siṃha, Ṭākuraharipāla -- Navalakiśora1898 SARDA
178 साङ्गीत प्रह्लाद / लक्ष्मणसिंह विरचित / Siṃha, Lakshmaṇa -- Navalakiśora1913 SARDA
179 श्रीसीताराम नखशिख / रघुबरसिंह चौधरीने निर्मित किया / Siṃha, Raghubara -- Navalakiśora1900 SARDA
180 जपग्रन्थ : श्रीगुरुनानकसर्वेश्वरप्रोक्त : व्याख्यान गुरुग्रन्थप्रदीप / साधुसिंहने निर्मितकिया / Sādhusiṃha -- 2. bāra -- Navalakiśora1906 SARDA

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